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Last Updated: June 15, 2026
पितृ पक्ष / श्राद्ध का आरंभ हो चुका है और श्राद्ध के महत्व को लेकर महाभारत के योद्धा कर्ण से जुड़ी एक कथा प्रचलित है। जब महाकाव्य महाभारत युद्ध में महान दानवीर कर्ण की मृत्यु हुई, तो उनकी आत्मा स्वर्ग लोक में पहुंची और वहां पर उन्हें नियमित भोजन की बजाय खाने के लिए ढ़ेर सारा सोना और सोने से बने आभूषण दिए गए।हालाँकि, कर्ण को खाने के लिए वास्तविक भोजन की आवश्यकता थी। तब कर्ण की आत्मा को कुछ समझ में नहीं आया और इस बात से निराश होकर कर्ण की आत्मा ने स्वर्ग के स्वामी इंद्र से भोजन के रूप में सोने परोसने का कारण पूछा।तब कर्ण के सवाल के जवाब में देवराज इंद्र ने बताया की तुमने अपने पूरे जीवन काल में सोना व सोने के आभूषणों ही दान किया थे। लेकिन श्राद्ध में कभी भी अपने पूर्वजों को भोजन नहीं दिया था। इसी कारण तुम्हें भी सोना व सोने के आभूषणों ही खाने के लिए दिया गया है। इस पर कर्ण ने कहा, चूंकि वह अपने पूर्वजों से अनजान थे तथा उन्हें अपने पूर्वजों के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था इसलिए उनकी स्मृति में कुछ भी दान नहीं कर पाया।यह सुनने के बाद, भगवान इंद्र ने कर्ण को अपनी गलती सुधारने के लिए